कभी सिर पर ख़ुमार था क़ामयाबी का,
अब तो सिर पर सिर्फ कुछ क़र्ज़ हो रहे हैं..!!
कमाया जो था वो क़स्बे में था ज़नाब,
शहर में तो हम बस ख़र्च हो रहे हैं..!!
अब तो सिर पर सिर्फ कुछ क़र्ज़ हो रहे हैं..!!
कमाया जो था वो क़स्बे में था ज़नाब,
शहर में तो हम बस ख़र्च हो रहे हैं..!!